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7 दिनों से हड़ताल पर सफाई कर्मचारी , फिर भी कुंभकर्णी नींद में कन्हान नगर परिषद प्रशासन


 7 दिनों से हड़ताल पर सफाई कर्मचारी , फिर भी कुंभकर्णी नींद में कन्हान नगर परिषद प्रशासन


350 रुपये में सफाई, 700 रुपये बाहरी कर्मचारियों को भुगतान ; मुख्याधिकारी, नगराध्यक्ष और ठेकेदार पर शोषण के गंभीर आरोप


कन्हान : - नागपुर जिले की पारशिवनी तहसील अंतर्गत कन्हान-पिपरी नगर परिषद में कार्यरत ठेका सफाई कर्मचारियों का आंदोलन सातवें दिन भी जारी है, लेकिन नगर परिषद प्रशासन की उदासीनता और संवेदनहीन रवैये से कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। नगर परिषद के मुख्याधिकारी दीपक घोडके, नगराध्यक्ष राजेंद्र शेंदरे, स्वच्छता सभापति तथा संबंधित ठेकेदार पर सफाई कर्मचारियों के साथ अन्याय और शोषण करने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।


आंदोलनरत कर्मचारियों का कहना है कि कन्हान नगर परिषद क्षेत्र का समावेश परिमंडल-2 में होने के बावजूद उन्हें प्रतिदिन केवल 350 रुपये मजदूरी दी जा रही है, जबकि महाराष्ट्र शासन के लागू नियमों और शासन निर्णय (GR) के अनुसार उन्हें अधिक मजदूरी मिलनी चाहिए। दूसरी ओर, नगर परिषद द्वारा बाहरी सफाई कर्मचारियों को लगभग 700 रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जा रहा है। समान कार्य के लिए दोहरी मजदूरी व्यवस्था ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


सफाई कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें सुरक्षा उपकरण भी समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाते। वर्ष में केवल एक बार दिए जाने वाले सुरक्षा उपकरणों की गुणवत्ता भी बेहद खराब होती है, जिससे कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना रहता है। गंदगी, नालियों और कचरे के बीच काम करने वाले कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध न कराना प्रशासन की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।


सात दिनों से लगातार आंदोलन जारी रहने के बावजूद नगर परिषद प्रशासन द्वारा कोई ठोस पहल नहीं किए जाने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगें न्यायसंगत हैं, तो प्रशासन बातचीत से समाधान निकालने के बजाय मौन क्यों है? आंदोलनकारियों का आरोप है कि मुख्याधिकारी, नगराध्यक्ष और संबंधित ठेकेदार कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय टालमटोल की नीति अपना रहे हैं।


कर्मचारियों ने मांग की है कि महाराष्ट्र शासन के नियमों के अनुसार उन्हें उचित दैनिक मजदूरी, गुणवत्तापूर्ण सुरक्षा उपकरण तथा श्रमिकों के सभी वैधानिक अधिकार तत्काल दिए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर परिषद प्रशासन और संबंधित ठेकेदार की होगी।


सह संपादक - ऋषभ बावनकर

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