स्टेडियम और प्राथमिक विद्यालय की आरक्षित भूमि निजी हाथों में सौंपने का आरोप
नगराध्यक्ष , नगरसेवक और नगर परिषद प्रशासन के खिलाफ जनाक्रोश
रिपब्लिकन भीमशक्ति ने ठराव रद्द करने की मांग की
जनहित की जमीन पर डाका बर्दाश्त नहीं, जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट जाएंगे - चंद्रशेखर भिमटे
कन्हान : नागपुर जिले की पारशिवनी तहसील अंतर्गत कन्हान-पिपरी नगर परिषद द्वारा स्टेडियम एवं प्राथमिक विद्यालय के लिए डीपीआर में आरक्षित भूमि को कथित रूप से निजी व्यक्तियों के पक्ष में सौंपने के निर्णय के खिलाफ जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। नगराध्यक्ष सहित 11 नगरसेवकों द्वारा पारित किए गए ठराव को जनहित के खिलाफ बताते हुए रिपब्लिकन भीमशक्ति के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने मुख्याधिकारी दीपक घोडके को ज्ञापन सौंपकर इस विवादित ठराव को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि कन्हान-सिहोरा स्थित सर्वे क्रमांक 102, 103 एवं 104 की कुल 3.12 हेक्टेयर भूमि डीपीआर में आरक्षण क्रमांक 30 के अंतर्गत स्टेडियम तथा आरक्षण क्रमांक 31 के अंतर्गत 0.41 हेक्टेयर भूमि प्राथमिक विद्यालय के लिए आरक्षित की गई थी। आरोप है कि नगर परिषद ने इन आरक्षणों को समाप्त कर संबंधित भूमि उज्ज्वल कुमार पारस एवं महेश अमरचंद अग्रवाल के पक्ष में देने का ठराव पारित कर दिया, जो जनहित के साथ खुला अन्याय है।
रिपब्लिकन भीमशक्ति ने नगराध्यक्ष और नगर परिषद प्रशासन पर जनता के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि खेल मैदान और विद्यालय जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित भूमि को निजी हितों के लिए सौंपना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
संगठन के चंद्रशेखर भिमटे ने कहा कि युवाओं के खेल, शिक्षा और शहर के विकास के लिए यह भूमि अत्यंत महत्वपूर्ण है। आरक्षण समाप्त करना जनता के हितों की अनदेखी है तथा यह सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में सौंपने का गंभीर प्रयास प्रतीत होता है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि नगर परिषद तत्काल यह ठराव रद्द कर आरक्षित भूमि को यथास्थिति बनाए रखे। यदि ऐसा नहीं किया गया तो संगठन मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ का दरवाजा खटखटाएगा। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि महाराष्ट्र शासन द्वारा स्वीकृत डीपी प्लान में आरक्षित भूमि को बदलने का अधिकार नगराध्यक्ष और नगर परिषद के पदाधिकारियों को किसने दिया।
इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी, विभागीय आयुक्त, ग्राम विकास मंत्री तथा मुख्यमंत्री से भी की गई है। संगठन ने मांग की है कि जनहित के विरुद्ध इस निर्णय का समर्थन करने वाले नगराध्यक्ष एवं संबंधित नगरसेवकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाया जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बढ़ते जनदबाव के बीच नगर परिषद प्रशासन अपना विवादित फैसला वापस लेगा इस ओर नागरिकों की निगाहें बनी हुई है।
सह संपादक - ऋषभ बावनकर


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