गहुहिवरा चौक पर नागरिकों का चक्काजाम, भारी वाहनों पर तत्काल रोक लगाने की मांग
टोल बचाने की कीमत जनता की जान से क्यों? प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ फूटा जनाक्रोश
कन्हान : - कन्हान शहर के गहुहिवरा चौक स्थित तारसा पुल पर लगातार हो रहे सड़क हादसों और भारी वाहनों की बेलगाम आवाजाही के खिलाफ शुक्रवार को नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने गहुहिवरा चौक स्थित पुलिया के सामने चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ तीव्र नाराजगी जताई और भारी वाहनों के आवागमन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की।
नागरिकों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से शहर के गहुहिवरा चौक स्थित तारसा पुल पर बड़ी संख्या में ओवरलोड भारी वाहनों की खतरनाक आवाजाही जारी है। लोगों का आरोप है कि कोयला, राख, गिट्टी और मिट्टी का परिवहन करने वाले ट्रक टोल टैक्स से बचने के लिए सीधे शहर के भीतर से गुजर रहे हैं। इस मार्ग पर स्कूल, महाविद्यालय, बाजार तथा बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है और नागरिकों के जीवन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
प्रतिदिन हजारों छात्र, पैदल यात्री और दोपहिया वाहन चालक इस पुल से आवागमन करते हैं, लेकिन भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि टोल टैक्स बचाने के लिए बड़ी संख्या में ट्रक और अन्य भारी वाहन इस मार्ग का उपयोग कर रहे हैं, जबकि इस सड़क पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है। इसके बावजूद संबंधित विभागों और प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण नो-एंट्री नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण आज यह सड़क आम लोगों के लिए खतरे का पर्याय बन गई है।
स्थानीय नागरिकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तारसा रोड अब केवल यातायात का मार्ग नहीं रहा, बल्कि अवैध गतिविधियों में संलिप्त वाहनों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर बन चुका है। कोयला परिवहन करने वाले ट्रकों के साथ-साथ अवैध रेत, मिट्टी परिवहन तथा मवेशी तस्करी में लगे वाहन भी दिन-रात इसी मार्ग से गुजर रहे हैं। कार्रवाई से बचने की जल्दबाजी में वाहन चालक तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाते हैं, जिससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
नागरिकों ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब तक किसी निर्दोष की जान नहीं जाती, तब तक अधिकारी कुर्सियों से नहीं उठते। लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्ती दिखाई होती, तो कई हादसों को रोका जा सकता था। प्रशासन की निष्क्रियता और उदासीन रवैये ने इस सड़क को अब "डेथ ट्रैप" में बदल दिया है।
आंदोलन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। चक्काजाम की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस निरीक्षक वैजयंती मांडवधरे ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा आवश्यक कारवाई का आश्वासन दिया। संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर भारी वाहनों पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने की बात कही गई।
हालांकि नागरिकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भारी वाहनों की आवाजाही पर तत्काल प्रभाव से रोक नहीं लगाई गई और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में और उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
जनता का सीधा सवाल है — आखिर नो-एंट्री केवल बोर्ड लगाने के लिए है या उसका पालन करवाने के लिए भी? यदि प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो किसी बड़े हादसे के बाद जवाब देने के लिए उसके पास कोई बहाना नहीं बचेगा।
सह संपादक - ऋषभ बावनकर


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