कन्हान में श्री श्याम झूला महोत्सव की धूम ; भक्ति गीतों पर झूम उठे श्याम प्रेमी
‘खाटू श्याम’, ‘राम आएंगे’ और ‘चौरागढ़’ जैसे भजनों से गूंजा कन्हान
श्री खाटू श्याम मंदिर के लिए 2500 वर्गफुट भूमि दान की घोषणा
कन्हान : - श्री श्याम सरकार परिवार, कन्हान की ओर से श्रावण शुक्ल पक्ष एकादशी के पावन अवसर पर आयोजित ‘श्री श्याम झूला महोत्सव’ भक्तिमय वातावरण में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।रविवार को अशोक नगर, कन्हान स्थित कुर्यात सदा मंगलम कार्यालय में आयोजित इस भव्य भजन संध्या में बड़ी संख्या में श्याम भक्त शामिल हुए और बाबा श्याम के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध भजन गायक मोनू अग्रवाल, विद्या धार्मिक, पूर्णिमा दीदी एवं उनकी टीम ने एक से बढ़कर एक भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘खाटू श्याम’, ‘राम आएंगे’, ‘आएंगे’, ‘चौरागढ़’ सहित अनेक लोकप्रिय भक्तिगीतों की मधुर धुनों पर श्याम प्रेमी देर रात तक झूमते और भक्ति में लीन नजर आए। पूरे परिसर में ‘जय श्री श्याम’ के जयघोष से भक्तिमय वातावरण बन गया।
श्री खाटू श्याम मंदिर के लिए 2500 वर्गफुट भूमि दान महोत्सव का विशेष आकर्षण उस समय देखने को मिला, जब कन्हान युथ फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष कैप्टन सतीश किशोर बेलसरे की ओर से गहुहिवरा रोड स्थित पाटील नगर में श्री खाटू श्याम मंदिर के भव्य निर्माण के लिए 2500 वर्गफुट भूमि दान करने की घोषणा की गई। इस घोषणा के बाद उपस्थित श्याम भक्तों में उत्साह की लहर दौड़ गई और पूरा परिसर ‘जय श्री श्याम’ के जयघोष से गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने कैप्टन बेलसरे के इस धार्मिक एवं सामाजिक योगदान की सराहना की।
इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के झूले के दर्शन कर पूजा-अर्चना की तथा भजन संध्या का आनंद लिया। श्रावण मास के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने कन्हान में आध्यात्मिक एवं भक्तिमय वातावरण का निर्माण किया।
कार्यक्रम की सफलता के लिए श्री श्याम सरकार परिवार, कन्हान के सतीश किशोर बेलसरे, महेश भरणे, सूर्यभान फरकाड़े, नितेश भरणे, गणेश रामापुरे, शैलेश झेंडे, आकाश भगत, महावीर यादव, सुवर्णा रामापुरे, भूमिका भरणे, निलिमा फरकाड़े, राधिका झेंडे, अस्मिता बेलसरे सहित पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने विशेष परिश्रम किया।
भक्ति, संगीत और श्रद्धा के इस अद्भुत संगम ने कन्हान के श्याम भक्तों के बीच एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक माहौल बना दिया।
सह संपादक - ऋषभ बावनकर


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